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ईरान पर बढ़ा हमले का खतरा, तेहरान के करीब स्पॉट हुआ दुनिया का सबसे बड़ा न्यूक्लियर एयरक्रॉफ्ट USS Gerald R. Ford

Written By: Dharmendra Kumar Mishra @dharmendramedia Published : Feb 22, 2026 06:46 pm IST, Updated : Feb 22, 2026 06:46 pm IST

दुनिया का सबसे खतरनाक न्यूक्लियर एयरक्रॉफ्ट कैरियर यूएसएस गेराल्ड आर फोर्ड को ईरान से बढ़ते तनाव के बीच भूमध्य सागर में स्पॉट किया गया है, जो मध्य-पूर्व की ओर आगे बढ़ रहा है। ईरान-अमेरिका परमाणु वार्ता विफल होने पर तेहरान पर हमले की आशंका इससे बढ़ गई है।

अमेरिका का न्यूक्लियर एयरक्रॉफ्ट कैरियर यूएसएस गेराल्ड आर फोर्ड (फाइल)- India TV Hindi
Image Source : AP अमेरिका का न्यूक्लियर एयरक्रॉफ्ट कैरियर यूएसएस गेराल्ड आर फोर्ड (फाइल)

वाशिंगटनः ईरान पर अब किसी भी वक्त हमले की आशंका कई गुना बढ़ गई है। अमेरिकी नौसेना का सबसे शक्तिशाली और दुनिया का सबसे बड़ा परमाणु-संचालित एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड (CVN-78) को जिब्राल्टर जलडमरूमध्य से भूमध्य सागर में प्रवेश करते स्पॉट किया गया है। फॉक्स न्यूज के अनुसार जिब्राल्टर जलडमरूमध्य से गुजरकर यह न्यूक्लियर एयरक्रॉफ्ट कैरियर भूमध्य सागर में प्रवेश कर गया। 

ईरान के करीब इस एयरक्रॉफ्ट के पहुंचने की घटना तेहरान के करीब अमेरिका की सैन्य तैनाती का हिस्सा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के आदेश पर इसे ईरान के साथ बढ़ते तनाव और संभावित सैन्य कार्रवाई के लिए क्षेत्र में अमेरिकी बलों को मजबूत करने के उद्देश्य तैनात किया गया है। 

क्या है यूएसएस गेराल्ड आर फोर्ड की ताकत

 यूएसएस गेराल्ड आर फोर्ड कैरियर स्ट्राइक ग्रुप में कैरियर के साथ गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर जैसे यूएसएस ग्रेट (DDG-72), यूएसएस विन्स्टन एस. चर्चिल और यूएसएस बेनब्रिज शामिल हैं। स्थानीय जहाज स्पॉटर्स और फोटोग्राफर्स ने जिब्राल्टर से ली गई तस्वीरों में कैरियर को मोरक्को के पहाड़ी इलाके के करीब देखा, जबकि जहाज पूर्व की ओर बढ़ रहा था। यह कैरियर जून 2025 से पहले भूमध्य सागर में, फिर वेनेजुएला ऑपरेशन (निकोलस मदुरो की गिरफ्तारी में सहयोग) के लिए कैरिबियन में तैनात था। अब इसे रीडायरेक्ट किया गया है, जो मध्य पूर्व की ओर आगे बढ़ रहा है।

यूएस का दूसरा खतरनाक जहाज पहले से तैनात

 राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर गेराल्ड आर फोर्ड को दक्षिणी कमांड से हटाकर मध्य पूर्व भेजा गया है। यहां पहले से ही यूएसएस अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप तैनात है, जो अमेरिका का दूसरा सबसे खतरनाक जहाज है। इससे क्षेत्र में दो कैरियर की दुर्लभ मौजूदगी बन गई है, जो ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत विफल होने पर हवाई हमलों की आशंका को बढ़ा रहा है। इस बीच अमेरिकी अधिकारी कहते हैं कि यह डिटरेंस और तेज प्रतिक्रिया के लिए है, जबकि ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान नया परमाणु समझौता नहीं करता तो "सीमित हमला" संभव है।  

ईरान कर रहा जवाबी हमले की तैयारी

फोर्ड कैरियर एयर विंग 8 के साथ 75 से अधिक फाइटर जेट्स (F-35C, F/A-18E/F), ईए-18जी ग्राउलर और अन्य विमान ले जा रहा है। यह दुनिया का सबसे उन्नत कैरियर है। यह इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कैटापल्ट, उन्नत रडार और अधिक विमान क्षमता वाला है। इसकी तैनाती को अब 8 महीने से अधिक हो चुके हैं, जो अप्रैल तक बढ़ सकती है, जिससे चालक दल पर भारी दबाव है।  यह अमेरिकी सैन्य बिल्डअप का हिस्सा है, जिसमें दर्जनों टैंकर, B-2 बॉम्बर और अन्य विमान शामिल हैं। अमेरिका के इस घेराव को देखते हुए ईरान ने भी जवाबी तैयारी की है, लेकिन अमेरिका कूटनीति को प्राथमिकता बताता है। फिलहाल फोर्ड अब भूमध्य सागर में है और कुछ दिनों में मध्य पूर्व पहुंच सकता है, जहां यह इजरायल की रक्षा और ईरान पर संभावित हमलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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